ना लाइक का मोह, ना स्क्रॉल का भय
ज़माना बदल गया है भाईसाहब! पहले लोग ताना मारते थे—"चेहरा देखा है आईने में?" अब लोग स्वयं ही एफबी, इंस्टा और व्हाट्सऐप पर बताते फिरते हैं—"चेहरा देखा है मेरा एआई में!" अब जब पूरा भारतवर्ष अपने-अपने मुखड़ों पर एआई का उबटन मल-मलकर रातों-रात 'यूनानी देवता' बनने में लगा हुआ था, तो भला हम कब तक इस राष्ट्रीय बहती गंगा से अछूते रहते? हमने अपना आईफ़ोन खंगाला और एक अदद फोटो निकालकर एआई के हवाले कर दी। अरे... फोटो भी कोई ऐसी-वैसी नहीं—ह्यूस्टन में हमारे घर से कुछ दूर उसी वॉटरवॉल पार्क की, जहाँ नब्बे के दशक के सुपरहिट गाने “दिलबर दिलबर” में यूनिवर्स सुंदरी सुष्मिता सेन पानी के ऊँचे झरने के सामने थिरकती दिखाई दी थीं। और हमारा साइड पोज़ भी पूरा संजय कपूर की स्टाइल वाला — बायीं कलाई पर एप्पल वॉच, कंधे पर उँगली के सहारे पीछे लटकाया हुआ काला लेविस का जैकेट। एआई ने तुरंत ही हमारी फोटो निखारकर दे दी। फोटो देखकर तो हम इतने गद्गद हुए कि क्या बताएँ! मन में आया कि इस तस्वीर की एक प्रति उन सभी रिश्तेदारों को भेजी जाए, जिन्होंने बचपन से जवानी तक हमारे साँवले रंग के सम्मान में हमें ए...